पति पिए शराब बीबी को मिले गहना

उत्तराखंड - नशामुक्ति के लिए लड़ रही ओसला गांव की महिलाओं ने साबित कर दिखाया है कि इच्छाशक्ति से बड़ा कोई कानून नहीं। नतीजा यह कि गांव के मर्दो को हर पैग की भारी कीमत अदा करनी पड़ रही है। शराब पीने पर उन्हें जुर्माना भरना पड़ता है- एक हजार रुपये नकद और एक बकरा। दोबारा वह न पिये, इसकी गारंटी के तौर उसकी पत्नी से एक तोला सोने की ज्वैलरी गिरवी रखवाई जाती है।
उत्तराखंड के सीमांत जिले उत्तरकाशी का ओसला गांव [पुरोला से करीब 150 किमी दूर] प्रदेश का अंतिम गांव है। हरकीदून-ज्योंदार ग्लेशियर के रास्ते में पड़ने वाला यह गांव आज तक सीधे सड़क से भी नहीं जुड़ा। लेकिन अक्षरज्ञान से वंचित महिलाओं की मुहिम का असर यह है कि एक महीने में ही शराबखोरी में कमी आने लगी है। ओसला के पुरुषों की शराब छुड़वाने के प्रयास पहले भी हो चुके हैं, पर तमाम कोशिशों के बाद जब शराब गांव की जिंदगी से नहीं गई तो महिलाओं ने एक समिति बनाई। उन्होंने तय किया कि जिस घर का पुरुष शराब पियेगा, उसकी पत्नी को एक तोला सोना दंड के रूप में जमा कराना होगा। यह भी तय किया गया कि वे शराबी पुरुष की डंडे से पिटाई करेंगी। ओसला के भजन सिंह ने बताया कि शराबबंदी की इस मुहिम के तहत दंड के रूप में जमा सोने की नथ या अन्य जेवर तिमाणी व गोलखे महिलाओं की समिति के पास तीन महीने तक गिरवी रहते हैं। इन तीन महीने में महिलाएं शराबी पर नजर रखती हैं। समिति के नियमों पर खरा उतरने पर महिलाएं उस परिवार का सोना तो वापस कर देती हैं, पर एक हजार रुपये और बकरा धरोहर के रूप में जमा रहते हैं। ओसला के ही प्रेमसिंह, जियानंद, करम सिंह और साबुलाल ने बताया कि महिलाओं के इस अनूठे शराबबंदी अभियान के तहत अब तक 82 तोले सोने के जेवर व 11 चांदी के सिक्के जमा किए जा चुके हैं। अपनी नशा विरोधी मुहिम की कामयाबी से महिलाएं काफी खुश और जोश में हैं। हाल में देहरादून की आप्टोइलेक्ट्रानिक फैक्ट्री का एक दल हरकीदून-जौंदार ग्लेशियर से लौटा, तो उसके सदस्यों शिशिर कुमार सिंह और जितेंद्र सिंह सिंधवाल ने बताया कि यह अनूठी मुहिम ओसला से शुरू होकर दो गांवों ढाटमीर और पंवाणी तक फैल चुकी है। जल्द ही गंगाड़ गांव की महिलाएं भी इस अभियान में शामिल होने जा रही हैं।

No comments: