राज्य गठन के आठ साल बाद भी सरकार स्थायी राजधानी चयन के मुद्दे पर गंभीर नहीं है। भाजपा सरकार भी पूर्ववर्ती कांग्रेस की राह पर चल रही है। दोनों दलों को जनता के हितों से कोई सरोकार नहीं है।
उत्तराखंड महिला मंच की गुरुवार को हुई बैठक में गैरसैंण राजधानी का मामला जोरशोर से उठा। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पहाड़ के विकास के लिए गैरसैंण राजधानी बनाने का सपना लोगों ने संजोया था लेकिन सरकार और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाने में मगन है। गैरसैंण राजधानी बनाने की मांग राज्य में ही नहीं अब विदेशों में रहने वाले प्रवासी उत्तराखंडी भी उठाने लगे है। इस दौरान राजनीतिज्ञों व नौकरशाहों पर जनता की मांग को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया गया। बैठक में देहरादून में 14 करोड़ की लागत से बन रहे मुख्यमंत्री आवास को राज्य के आम लोगों के साथ धोखा बताया गया।
बैठक में कहा गया कि राजधानी तय न होने के बावजूद सीएम आवास का निर्माण करना सरकारी धन की बरबादी है। वक्ताओं का कहना था कि कांग्रेस-भाजपा की कोशिशों के बाद भी जनता पूरी तरह गैरसैंण को ही राजधानी बनाने की पक्षधर है। इस मौके पर भाजपा सरकार पर पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के पदचिन्हों पर चलने की तोहमत मढ़ी।
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